Thursday, April 24, 2014

आज मुझे चमार नहीं ब्राह्मण समझना

आज मेरी आत्मा मर गई
तो मैंने मुंडन करवा लिया
पंडो को बुला भोजन करवा दिया
ओन डिमांड- कबाब, नहारी और शावरमा बनवाया था

बदले में पंडो ने दक्षिणा में बस
कसम खिलवाई थी
कि अगली बार भी यही खिलायूँगा
और मोहल्ले पड़ोस में किसी को नहीं बतायूंगा

मैंने भी किसी राज की तरह
ये बात अपने सीने में दफ़न कर दी

आज मेरी आत्मा मर गई
तो मैंने मुंडन करवा लिया
पंडो को बुला भोजन करवा दिया

आज मुझे चमार नहीं ब्राह्मण समझना